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चुनाव 26 : आसनसोल दक्षिण में कोयला अर्थव्यवस्था और पहचान की राजनीति से दिलचस्प हुई चुनावी लड़ाई

भारतीय जनता पार्टी, जिसने 2021 में यह सीट तृणमूल कांग्रेस से जीती थी, इस बार भी इसे बचाए रखने की कोशिश में है। पार्टी ने मौजूदा विधायक अग्निमित्रा पॉल को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने पूर्व विधायक तापस बनर्जी को मैदान में उतारा है, जो 2011 और 2016 में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

01 Apr 2026

चुनाव 26 : आसनसोल दक्षिण में कोयला अर्थव्यवस्था और पहचान की राजनीति से दिलचस्प हुई चुनावी लड़ाई

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में आसनसोल दक्षिण सीट पर कोयला अर्थव्यवस्था में गिरावट, अवैध खनन और पहचान की राजनीति चुनावी मुकाबले को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दे बनकर उभर रहे हैं। पश्चिम बर्धमान जिले की यह शहरी-औद्योगिक सीट रानीगंज कोयला क्षेत्र का हिस्सा है, जहां उद्योगों की धीमी होती रफ्तार, अनौपचारिक कोयला नेटवर्क और जनसांख्यिकीय बदलाव राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी, जिसने 2021 में यह सीट तृणमूल कांग्रेस से जीती थी, इस बार भी इसे बचाए रखने की कोशिश में है। पार्टी ने मौजूदा विधायक अग्निमित्रा पॉल को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने पूर्व विधायक तापस बनर्जी को मैदान में उतारा है, जो 2011 और 2016 में इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शिल्पी चक्रवर्ती और कांग्रेस ने सौविक मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया है।

2021 के चुनाव में अग्निमित्रा पॉल ने तृणमूल कांग्रेस की सायोनी घोष को 4,487 मतों से हराया था, जिसे इस औद्योगिक क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी सफलता माना गया था। हालांकि 2022 के लोकसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा की बड़ी जीत से इस क्षेत्र में पार्टी की स्थिति को झटका लगा था।

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रोजगार और अवैध खनन बड़ा मुद्दा

रानीगंज कोयला क्षेत्र कभी हजारों लोगों को स्थायी रोजगार देता था, लेकिन स्वचालन और पुनर्गठन के कारण प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर कम हुए हैं। इसके चलते कई लोग अनौपचारिक काम या पलायन की ओर मजबूर हुए हैं। दूसरी ओर अवैध कोयला खनन आज भी आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए आजीविका का साधन बना हुआ है, जिससे इस पर कार्रवाई राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन जाता है।

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धंसान की समस्या से परेशान लोग

दशकों से हो रहे खनन के कारण कई इलाकों में जमीन धंसने की समस्या भी गंभीर है। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मकानों में दरार, जमीन बैठने और हादसों का खतरा बना रहता है। पुनर्वास, मुआवजा और सुरक्षा उपाय यहां के प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल हैं।

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पहचान की राजनीति भी प्रभावी

आसनसोल दक्षिण की सामाजिक संरचना काफी विविध है। यहां बिहार और झारखंड मूल के हिंदीभाषी मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 35 से 40 प्रतिशत है। भारतीय जनता पार्टी भाषाई विभाजन से ऊपर उठकर हिंदू मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस बंगाली मतदाताओं और अल्पसंख्यकों के अपने पारंपरिक समर्थन आधार को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।

राम नवमी जैसे धार्मिक आयोजनों के जरिए राजनीतिक सक्रियता ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया है।

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वार-पलटवार का सिलसिला जारी

भारतीय जनता पार्टी ने कोयला तस्करी, भर्ती अनियमितता और स्थानीय सिंडिकेट जैसे मुद्दों को उठाया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने का आरोप लगाया और राज्य सरकार की सामाजिक योजनाओं तथा विकास कार्यों को अपनी ताकत बताया।

विश्लेषकों का मानना है कि विविध सामाजिक संरचना और किसी एक प्रभावशाली मतदाता समूह के अभाव में यहां मुकाबला कड़ा रह सकता है। छोटे-छोटे मत प्रतिशत बदलाव भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। वाम दल भले मुख्य दावेदार न हों, लेकिन उनके मत चुनाव परिणाम पर असर डाल सकते हैं।

आसनसोल नगर निगम के कई वार्डों के साथ अमरसोटा, एगरा, बल्लवपुर, जेमारी और तिराट ग्राम पंचायत भी इस विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं। यहां पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना चार मई को होगी।

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